बक्सर, 1 अगस्त (DB नेशन न्यूज):
महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर में शनिवार को इतिहास, साहित्य और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रधानाचार्य प्रो. कृष्णकांत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस त्रिस्तरीय कार्यक्रम में गांधीवादी विचारों पर विभागीय संगोष्ठी, प्रेमचंद दिवस तथा माँ निर्मला देवी फाउंडेशन के तत्वावधान में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। दिनभर चले इस आयोजन में शिक्षकों, साहित्यकारों और छात्र-छात्राओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
कार्यक्रम के प्रथम चरण में स्नातकोत्तर इतिहास विभाग द्वारा \'सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह की समकालीन प्रासंगिकता\' विषय पर विभागीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें लगभग 36 छात्र-छात्राओं ने गांधीवादी दर्शन पर अपने शोधपरक विचार प्रस्तुत किए। विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुमार ने विषय की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि मुख्य अतिथि प्रो. मृत्युंजय सिंह ने अपने व्याख्यान में वैश्विक परिप्रेक्ष्य में साहित्य और इतिहास के स्वरूप एवं प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की तथा विद्यार्थियों के प्रश्नों का तार्किक एवं प्रमाणिक उत्तर देकर उन्हें संतुष्ट किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नवीन कुमार पाठक ने किया।
दूसरे चरण में मुंशी प्रेमचंद जयंती के अवसर पर आयोजित प्रेमचंद दिवस में वक्ताओं ने उनके साहित्य की सामाजिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि प्रो. मृत्युंजय सिंह तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. पंकज कुमार चौधरी ने प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहा है।
तीसरे चरण में माँ निर्मला देवी फाउंडेशन के सौजन्य से आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन ने पूरे वातावरण को काव्यमय बना दिया। कवि प्रीतम जी , चिन्मय प्रकाश झा, वशिष्ठ पाण्डेय, नर्मदेश्वर उपाध्याय, श्री भगवान पांडेय, संजय सागर और कैफ आजमी ने राष्ट्रभक्ति, प्रेम, समाज, भाषा और समकालीन व्यवस्था पर आधारित अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पंकज कुमार चौधरी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. श्वेत प्रकाश ने किया।
कार्यक्रम के समापन पर माँ निर्मला देवी फाउंडेशन के सचिव डॉ. रासबिहारी शर्मा के सौजन्य से सभी अतिथियों, कवियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं के लिए पारंपरिक लिट्टी-चोखा एवं खीर का प्रीतिभोज आयोजित किया गया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।
इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार ने इसे शिक्षा, साहित्य और सांस्कृतिक चेतना को समर्पित एक ऐतिहासिक आयोजन बताते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन का संकल्प दोहराया।







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